सरसों के दाने के ये उपाय दूर करते हैं नज़र दोष और आर्थिक रुकावटें

By: Raj

On: Monday, November 24, 2025 11:42 AM

sarso ke dane ke yeh upaye
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भारतीय परंपरा में सरसों के दाने को सिर्फ मसाला या आयुर्वेद का हिस्सा नहीं माना जाता, बल्कि इसे कई शुभ कार्यों और धार्मिक मान्यताओं में भी खास स्थान दिया गया है। सदियों से लोग सरसों का उपयोग बुरी नजर दूर करने, नकारात्मकता कम करने और घर में सकारात्मकता बढ़ाने के प्रतीक के रूप में करते आए हैं।

इन मान्यताओं का आधार सांस्कृतिक विश्वास है, जिन्हें परिवारों ने पीढ़ियों से अपनाकर एक परंपरा का रूप दे दिया है। माना जाता है कि सरसों के दाने में ऐसी ऊर्जा होती है जो घर के वातावरण को हल्का, सकारात्मक और स्थिर बनाती है।

सरसों के दाने से नज़र दोष उतारने की परंपरा

नज़र दोष से बचाव के उपाय भारतीय घरों में बहुत आम हैं, और इनमें सरसों का उपयोग प्रमुख माना गया है।

परंपराओं के अनुसार, किसी व्यक्ति पर नज़र लगने की आशंका हो तो:

  • कुछ सरसों के दाने,
  • एक लाल मिर्च,
  • और थोड़ा सा नमक

इन सबको एक साथ व्यक्ति के ऊपर से तीन बार घुमाकर दूर फेंक दिया जाता है।
माना जाता है कि यह उपाय नज़र दोष की नकारात्मकता को दूर करता है और व्यक्ति के मन को हल्का महसूस करवाता है।

ध्यान रहे, यह सिर्फ एक सांस्कृतिक प्रथा है, जिसका उद्देश्य केवल मानसिक शांति और सांस्कृतिक जुड़ाव से है।

मुख्य द्वार पर सरसों के दाने—सकारात्मक ऊर्जा का संकेत

कई घरों में मुख्य द्वार के पास सरसों के कुछ दाने या सरसों की पोटली रखी जाती है।
मान्यता है कि इससे घर के अंदर नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश कम होता है और वातावरण शांत बना रहता है।

यह उपाय त्योहारों, ग्रह प्रवेश या नए काम की शुरुआत में विशेष रूप से अपनाया जाता है।

सरसों का दान—आर्थिक रुकावटें कम होने की मान्यता

कई धार्मिक परंपराओं में माना जाता है कि सरसों का दान सौभाग्य का संकेत है।
विशेष दिनों या पूजा के बाद सरसों दान करने से आर्थिक स्थिरता आने की मान्यता सदियों पुरानी है।

लोग इसे आर्थिक बाधाओं के प्रतीकात्मक निवारण के रूप में भी देखते हैं।

हवन में सरसों का उपयोग—सद्भाव और शुद्धता का संकेत

हवन, यज्ञ या ध्यान संबंधी अनुष्ठानों में सरसों के दाने जलाने की परंपरा भी कई जगहों पर प्रचलित है।

पारंपरिक मान्यता है कि सरसों का धुआं वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक महसूस करवाता है।
यह तरीका मानसिक एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन के लिए भी प्रतीकात्मक रूप से उपयोग किया जाता है।

धन-संबंधी बाधाओं में सरसों का महत्व

कुछ लोग पूजा-पाठ के दौरान सरसों के दाने को धनलाभ और समृद्धि का प्रतीक मानते हैं।
त्योहारों जैसे दीपावली, धनतेरस, अक्षय तृतीया पर सरसों को लक्ष्मी-पूजन में भी उपयोग किया जाता है।

मान्यता है कि इससे आर्थिक रुकावटें कम प्रतीत होती हैं और घर में स्थिरता बनी रहती है।

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सरसों का छिड़काव — नकारात्मकता दूर करने की परंपरा

कई परंपराओं में घर के कोनों, आंगन या मुख्य द्वार पर सरसों के दाने हल्के से छिड़के जाते हैं।
यह तरीका किसी घर में लंबे समय से जमी नकारात्मकता को हटाने का प्रतीक माना जाता है।

यह विशेष रूप से तब किया जाता है जब घर में नए मेहमान आए हों, कोई बड़ा काम शुरू हो रहा हो, या वातावरण में भारीपन महसूस हो रहा हो।

रोजमर्रा की पूजा में सरसों—शुभता का संकेत

पूजा थाली में सरसों का रखना शुभ माना जाता है।
कई लोग इसे देवी-देवताओं के प्रति सम्मान और पवित्रता का प्रतीक मानते हैं।
इसका उद्देश्य सिर्फ धार्मिक भावना और सकारात्मक माहौल बनाए रखना होता है।

निष्कर्ष

सरसों के दाने से जुड़े ये उपाय भारतीय संस्कृति और पारंपरिक विश्वासों का हिस्सा हैं।
नज़र दोष दूर करने से लेकर आर्थिक बाधाओं को प्रतीकात्मक रूप से कम करने तक—इनका उपयोग भावनात्मक संतुलन, मानसिक शांति और सकारात्मक वातावरण अनुभव करने के लिए किया जाता है।

चाहे वैज्ञानिक दृष्टिकोण न हो, लेकिन इन परंपराओं का महत्व लोगों की आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव से जुड़ा है, जिसने इन्हें पीढ़ियों तक जीवित रखा है।

Raj

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